मेरे मित्र

Friday, May 24, 2013

तुझे मिटना है

ये बताने के लिए कौन किसका कितना है ,
प्यार दिखलाना है पड़ता ह्रदय में जितना है |
मौन की राह पर मंजिल नहीं मिलती अक्सर ,
हक़ से उस नाम के साथ नाम तुझको लिखना है |
दौर इस तरह का है दोस्त मेरे सुन ले तू ,
कुछ भी पाने के लिए रोज़ तुझको बिकना है |
प्यार वरदान है पर इतनी परीछा लेगा ,
जिंदा रहने की कसम खा के तुझे मिटना है |
 

Saturday, May 18, 2013

जीवन दर्शन

सुधरने और बिगड़ने का भी सब का वक़्त होता है ,
कोई बचपन की गलती फिर बुढ़ापे में नहीं करता |
जिसने कल तलक झेली हो पर्दों की कमी घर में ,
किसी नंगे बदन को और वो नंगा नहीं करता |

की जिस बच्चे ने आँगन में छिड़ी देखी महाभारत ,
वो बच्चा फिर किसी भी बात पर दंगा नहीं करता |


हो जिसकी ज़िन्दगी में प्यार के रंगों की फुलवारी
वो अपने कैनवस को फिर कभी रंगा नहीं करता |

अगर इंसानियत इंसान में आ जाये तो फिर वो ,
किसी की माँ के आँचल को कभी गन्दा नहीं करता |


Wednesday, May 15, 2013

नयी शुरुआत

फिर नए उत्साह से मैंने नयी शुरुआत की है ,
आज के इस अंशुमान ने नयी प्रभात की है |

है जगे कुछ स्वप्न नयनो के तले जो सो रहे थे ,
और निद्रा की गली में बेवजह ही रो रहे थे ,
आज फिर मेरे ह्रदय ने प्रेम की बरसात की है ,
फिर नयी शुरुआत की है |

पर कटे पंछी हुए थे आसमा को तक रहे थे ,
और अपने भाग्य को हम रोज ताने कस रहे थे ,
आज गुरु के शब्द से मैंने नयी उड़ान ली है ,
फिर नयी शुरुआत की है |

कौन कहता है मुझे अब रोक लेगा विश्व सारा ,
मैं समंदर बन गयी हूँ बांध है और न किनारा ,
आज फिर मैंने मेरी पायल से एक झंकार की है ,
फिर नयी शुरुआत की है |

Monday, May 13, 2013

ऊर्जा

मुझे परिवर्तित करने में
निरंतर लग्न हो तुम ,
कभी मेरी हंसी को ,
कभी मेरी बोली को ,
कभी मेरे वाद विवाद को ,
कभी मेरे ह्रदय के सुख और विषाद को ,
मेरे पहनने के ढंग को ,
मेरे चेहरे के रंग को ,
मेरे गाये राग को ,
तुझसे किये गए मेरे हर संवाद को ,

कितनी ऊर्जा है तुममे ,
तुम खुद को शाश्वत बनाने की प्रकिया छोड़ ,
संलग्न हो
मुझे परिवर्तित करने में|

शिव

कोई मुझे ये समझाए ,
की क्यूँ
मैं खुद को बदलूं ,
जब उसने मुझे ऐसा बनाया है ,
जो मुझे ऐसा देखना चाहता है ,
मेरा और तुम्हारा
शिव|

Sunday, May 12, 2013

वो नयी दुल्हन |

अपने घुटनों को
अपने पेट में छिपाए ,
सर अपनी छाती से लगाये ,
एक पुराने से कमरे में ,
नए कपड़ों में सजी
नए भावों से बंधी ,
वो
कभी मुस्कुराती ,
कभी शर्माती ,
कभी किसी के आने पर और
सिमट जाती ,
कभी जीवन के इस बदलाव के भय से ,
अपने पिता की याद में गुम हो जाती
वो नयी दुल्हन |
कल अपना आँगन छोड़ते ही
अपना लिया मेरा आँगन ,
अपने कमरे की साज सज्जा
से जयादा उसे भाई ,
मेरे कमरे की अस्तव्यस्तता ,
एक रात ही तो गुज़री थी ,
मैं समझ ही न सका
कौन है वो , कैसी है वो ,
क्या भाता है उसे ,
कौन रिझाता है उसे ,
पर अगले दिन सुबह
मेरी पसंद का नाश्ता बनाती ,
वो नयी दुल्हन |
 

Friday, May 10, 2013

चाँद में रोटी

रच रही हूँ अपने ही हांथों नया आकाश देखो ,
और फिर उड़ने की चाहत का मेरा आगाज़ देखो |
श्वेत सुन्दर और चमकीला अनन्त असीम है जो ,
आज मेरे स्वप्न में परियों का ऐसा चाँद देखो |
फिर नए मुक्तक सुनाती ज़िन्दगी खुश सी लगी थी ,
पर ज़रा झांको ह्रदय में गम का वो सैलाब देखो |
कल बहुत सी रोटियां फेंकी थी हमने बच गयी थी ,
जिनको दिखती चाँद में रोटी उन्हें इकबार देखो |
स्वप्न लाखों के करोड़ों में हैं बिकते आज कल पर  ,
एक नंगे से बदन का बिक रहा सम्मान देखो |